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हवाबन्द, इजोत नहि घुसऽ बला, ठण्ढा आ सुक्खल, आ मसाला सँ दूर। चाह रसोइक सभ सँ बेसी सोखऽ बला वस्तुमे सँ एक थिक: ओ बगलमे राखल हर वस्तुक गन्ध पकड़ि लैत अछि आ अपन बास हवा, इजोत आ नमी केँ सौंपि दैत अछि। खुजल पैकेट ठीक सँ राखल जाय तँ मास मास धरि नीक रहैत अछि। ओएह पैकेट मसालाक डिब्बाक बगलमे खुजल रहय तँ पन्द्रह दिनहिमे स्पष्ट फिक्का पड़ि जाइत अछि।

केओ चाह ई सोचि कऽ नहि कीनैत अछि जे ओकरा बासि होमय देब, मुदा बेसीभाग रसोइ ओकरा एहि तरहेँ रखैत अछि जे इएह निश्चित भऽ जाइत अछि। चाह केँ असलमे की नोकसान करैत अछि, महत्त्वक क्रममे।

चाह पत्ती फिक्का किएक पड़ैत अछि?

हवा। जे तत्त्व चाह केँ बास दैत अछि से उड़ि जाइबला थिक, आ ताहि सँ अहाँ ओकरा सूँघि सकैत छी। खुजल छोड़ि देला पर से चलि जाइत अछि। इएह मुख्य कारण थिक आ ताहि सँ हवाबन्द डिब्बा बाकी सभ उपाय मिला कऽ सेहो ओहि सभ सँ भारी पड़ैत अछि।

नमी। सीटीसीक दाना सुक्खल आ छिद्रदार अछि आ नम हवा सँ पानि घीचि लैत अछि, जे मुम्बईमे जून सँ सितम्बर धरि असली समस्या थिक। नम चाह जल्दी तेजी हरा दैत अछि आ एक सीमाक बाद ओहिमे फफूँदी लागि जाइत अछि।

इजोत। सोझ रौद चाह केँ खराब करैत अछि, आ ताहि सँ ओ पारदर्शी बर्नीमे नहि, बन्द पैकेटमे बिकाइत अछि। रौद पड़ऽ बला ताख पर राखल काँचक बर्नी बेसीभाग रसोइक सभ सँ खराब डिब्बा थिक, देखबामे कतबो सुन्दर लागय।

ताप। ऊपर लिखल हर गप्प चुल्हाक बगलमे जल्दी होइत अछि।

गन्ध। ई गप्प लोक केँ चकित करैत अछि। चाह गन्ध बहुत आसानी सँ सोखि लैत अछि। ओकरा हींग, लहसुन वा खुजल मसालाक डिब्बाक बगलमे राखू आ किछुए सप्ताहमे ओकर स्वाद ओएह भऽ जाएत।

ओकरा कोना रखबाक चाही?

चाह पत्ती रखबाक ढङ्ग
ई करू ई नहि करू
हवाबन्द स्टील वा चीनी माटिक डिब्बा दिनक इजोतमे राखल काँचक बर्नी
ठण्ढा, अन्हार आलमारी चुल्हाक ऊपर वा बगलक ताख
मसाला, कॉफी आ पियाज सँ दूर मसालाक डिब्बाक बगलमे
हर बेर सुक्खल चम्मच भीजल वा प्रयोग कएल चम्मच
मूल पैकेट, मोड़ि कऽ आ बन्द कऽ कऽ, डिब्बाक भीतर बन्द नहि होबऽ बला कोनो वस्तुमे उझलि देब

सुक्खल चम्मच बाकी सँ छोट गप्प थिक मुदा पैकेट केँ सभ सँ जल्दी इएह खराब करैत अछि। एक बेर भीजल चम्मच भीतर गेला सँ एतेक नमी आबि जाइत अछि जे डल्ला बनऽ लगैत अछि, आ डल्ला पसरैत अछि।

की चाह फ्रिजमे रखबाक चाही?

नहि। ई सलाह देल जाइत अछि आ भारतीय रसोइमे सीटीसी लेल ई गलत अछि।

हर बेर जखन ठण्ढा डिब्बा गरम कोठलीमे बाहर अबैत अछि तखन भीतरक वस्तु पर नमी जमि जाइत अछि। रोज ई करब चाह लेल आलमारीमे पड़ल रहबा सँ खराब अछि। फ्रिज सेहो गन्ध सँ भरल रहैत अछि, आ चाह ओकरा ताकि लेत।

ठण्ढा, अन्हार आ बन्द, पूरा निर्देश इएह थिक। बरफ जकाँ ठण्ढा एकर भाग नहि थिक।

चाह पत्ती कतेक दिन नीक रहैत अछि?

बन्द आ ठीक सँ राखल चाह ओहि तरहेँ खराब नहि होइत अछि जेना खाना खराब होइत अछि। ओ फिक्का पड़ैत अछि। पैकेट पर छपल पैकिंगक तारीख देखू, आ ओहि पर लिखल प्रयोगक सीमा केँ अपन मानक बनाउ।

पैकेट खुजितहि घड़ी बहुत जल्दी भऽ जाइत अछि। नीक जकाँ राखल खुजल पैकेट किछु मास अपन स्वभाव सम्हारने रहैत अछि। खराब तरहेँ राखल पैकेट दू तीन सप्ताहहिमे स्पष्ट मन्द भऽ जाइत अछि।

ई ओहि आकारक पैकेट किनबाक व्यावहारिक तर्क थिक जकरा अहाँ सचमुच खतम कऽ लेब। प्रति कप किलो 250 ग्रामक पैकेट सँ सस्त पड़ैत अछि, मुदा केवल जँ अहाँक घर ओकरा किछुए मासमे पीबि लेय। दू गोटे दिनमे दू कप पीबी तँ एक किलो लगभग सात मासक चाह थिक, जे खुजलाक बाद ओकर सभ सँ नीक रहबाक अवधि सँ नमहर अछि। दू पैकेट 500 ग्रामक, एक बेरमे एक खोलि कऽ, नीक सौदा थिक।

चाह फिक्का पड़ि गेल ई कोना बुझी?

सुक्खल सूँघू। नीक सीटीसी पैकेटहि सँ माल्टी आ तेज बास दैत अछि। फिक्का चाह सँ बहुत कम बास अबैत अछि, वा हल्लुक आलमारीक।

तखन एक चम्मच साधारण पानिमे बिनु दूधक बनाउ। जँ रङ पातर अबैत अछि आ अन्तमे कोनो काटब नहि अछि, तँ ओ चलि गेल। दूध आ चीनी ई गप्प अहाँ सँ झाँपि लेत, आ ठीक ताहि सँ परीक्षा ओकरा बिनु करबाक चाही।

लिखलनि मुम्बईक गणेश प्रीमियम टी परिवार, जे 1986 सँ एकहि कड़क आसाम सीटीसी बनबैत आबि रहल अछि। हमरा सभक विषयमे आओर।

पढ़ैत एतबे होइत अछि।

जाहि चाहक ई सब गप्प अछि, से 100 ग्राम सँ 1 किलो धरि, समस्त भारतमे पहुँचाओल जाइत अछि।

चाह कीनू